कविता

टिप टिप टिप टिप बूंदे

टिप टिप टिप टिप बूंदे
टिप टिप टिप टिप बूंदे ये मचा रही हैं शोर
मन में कौंधा सा हुआ मेघ घिरे घनघोर।

टिप टिप टिप टिप बूंदे ये मचा रही हैं शोर
पढ़ा लिखना ताक धर हो गए भाव विभोर।

टिप टिप टिप टिप बूंदे ये मचा रही हैं शोर
धक धक कर दिल झूमता जैसे नाचे मोर।

टिप टिप टिप टिप बूंदे ये मचा रही हैं शोर
अंदर ज्वालाएं उठीं पुलकित मैं चहुँ ओर।

©शुभम शर्मा 'शंख्यधार' शुभम शर्मा का जन्म जिला शाहजहांपुर यू ०प्र० के एक छोटे से कस्बे खुटार में हुआ। ये उन स्वतंत्र लेखकों में से हैं जो सिर्फ अपने मनोरंजन के लिए तथा अपने खाली समय में अपने अंदर झांककर उसका सदुपयोग करने के लिए लेखन करते हैं। आप…

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