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कविता

इस बार दिवाली ………

इस बार दिवाली ………

इस बार दीवाली कुछ अलग है,
कर रही हमें ये सजग है,,
दे रही उम्मीदों की झलक है,,,
ज़िंदा रहने की सिर्फ़ ललक है ।

इस बार सफ़ाई नहीं प्राथमिकता,
पकवानों में भी मन नहीं लगता,,
वेशभूषा की और अब ध्यान नहीं टिकता,,,
गहनों का भी आकर्षण नहीं दिखता ।

ना ख़रीदारी है,
ना जेब भारी है,,
पटाखों की दुकान भी ख़ाली है,,,
बड़ी मुश्किल से ज़िन्दगी संभाली है ।

लंबी छुटियों का जोश नहीं,
सैर सपाटे की होड़ नहीं,,
तरक्क़ी की भी दौड़ नहीं,,,
बढ़ोतरी भी उम्मीद छोड़ गई ।

अब तो बस बचना व बचाना है,
जीवित हैं, ये शुकराना है,,
हर शय की क़दर को जाना है,,,
प्यार दुआओं का खोजें खज़ाना हैं ।

ये दिवाली दे रही अजब नसीहत है,
परिवार संग ज़िन्दगी खूबसूरत है,,
कुटुम्ब नींव, कुटुम्ब छत है,,,
सुख दुख साझा, ये अमृत है ।

आओ दिये जलाएँ हम उनके लिए,
जो कर्मवीर छोड़ हमें चल दिए,,
वे हुए शहीद कि हम जीएँ,,,
करें अदा फ़र्ज़ उनके कुल के लिए ।

आओ फैलाएं खुशियां हम,
दें मदद, हुए बेरोज़गार जो जन,,
सहयोग करें,जो कारोबार हुए ठप,,,
स्वस्थ खुशहाल हो बेहतर कल ।

अभिनव ✍🏻

अभिनव कुमार एक साधारण छवि वाले व्यक्ति हैं । वे विधायी कानून में स्नातक हैं और कंपनी सचिव हैं । अपने व्यस्त जीवन में से कुछ समय निकालकर उन्हें कविताएं लिखने का शौक है या यूं कहें कि जुनून सा है ! सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि वे इससे तनाव मुक्त महसूस करते…

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